ASHTAVAKRA GITA

ASHTAVAKRA GITA


अष्टवक्र उवाच।

मुक्तिमिच्छसि चेत्तात विषयान् विषवत्त्यज।

क्षमार्जवदयातोषसत्यं पीयूषवद्भज।।1.2।।