ASHTAVAKRA GITA

ASHTAVAKRA GITA


न कदाचिज्जगत्यस्मिन् तत्त्वज्ञो हन्त खिद्यति।

यत एकेन तेनेदं पूर्णं ब्रह्माण्डमण्डलम्।।17.2।।