ASHTAVAKRA GITA

ASHTAVAKRA GITA


क्व प्रमाता प्रमाणं वा क्व प्रमेयं क्व च प्रमा।

क्व किञ्चित् क्व न किञ्चिद्वा सर्वदा विमलस्य मे।।20.8।।